कुछ चर्चा हिन्दी में और हिन्दी के बारे में।

If you do not know Hindi, do not bother, everything here is only about depletion of standards of Hindi language.

मैं और हिन्दी:

हिन्दी मेरी मात्र भाषा नहीं है । मेरे माता पिता आपस में पंजाबी में बात करते थे परन्तु हम बच्चों से हिन्दी में बात करते थे । मज़े की बात यह है कि पंजाबी मैंने दोस्तों से हाई स्कूल में सीखी । मैं अपने को कोई हिन्दी प्रेमी नहीं कहूँगा । मुझे संसकि्रत और उर्दू ज़्यादा आकर्षित करती है । परन्तु लुप्त होती हिन्दी के बारे में कोई चर्चा ना देख के मुझे ही पहल करनी पड़ रही है । मज़े की बात यह है हिन्दी मे टाईप करना आईफ़ोन के कुंजीपटल के कारण संम्भव हो पाया है।

हिन्दी और वकालत:

हिन्दी को मैंने कक्षा ८ तक ही पड़ा और वकालत में सिर्फ़ आपराधिक मामलों में ही इसकी ज़रूरत पड़ती है । दिल्ली में नीचे के न्यायालय में भी अंग्रेज़ी का ही वर्चस्व है । इसके बावजूद मेरी हिन्दी बेहतर है पर उसका श्रेय बचपन में पढ़ें उपन्यासों को और अन्तर्जाल पर हिन्दी के समाचारपत्रों को जाता है ।
हिन्दी का एक लाभ और है । कइ बार दूसरी भाषाओं से हिन्दी में अनुवादित पुस्तकें बहुत ही सस्ती क़ीमत पर उपलब्ध हो जाती है । बचपन में मैंने कार्ल मार्क्स की पूँजी किताब हिन्दी में पढ़ी ।

कुछ वर्ष पहले मैं हिन्दी भाषी छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय गया और मुख्य न्यायाधीश की दरबार में बैठा था । एक अधिवक्ता महोदय उपस्थित हो कर चुपचाप खड़े हो गये । कुछ बोले ही नहीं । इस पर मुख्य न्यायाधीश ने उनसे कहा
‘महोदय, इस वाद में आपको अपने पक्ष में कुछ तर्क प्रस्तुत करना है? आप हिन्दी में ही बता दे । ‘
मेरे अनुभव में हिन्दी को किसी भी उच्च न्यायालय इतनी उचांई पर कभी और नहीं देखा । परन्तु क्यों नहीं ?

हिन्दी का शव घसीटते हिन्दी समाचार पत्र:

Dainik-bhasker
आपने कभी हिन्दी समाचार पत्र पढ़ा? क्या वह हिन्दी में है?  ज़रा यह पढ़ कर बतायें:

स्टेजफ्राइट एक सामान्य से MMS में एक मॉडिफाइड फाइल डिलिवर करता है जो ऐंड्रॉयड सिक्यॉरिटी को फेल कर रिमोट कोड लगा देती है और फाइल्स, स्टोरेज, कैमरा और माइक्रोफोन्स का ऐक्सेस बग को दे देती है। जिम्पेरियम ने नेक्सस 5 पर इसके स्क्रीनशॉट लिए जिसमें लेटेस्ट ऐंड्रॉयड लॉलीपॉप 5.1.1 है।

फिशिंग अटैक्स से अलग, यहां यूदर को फाइल खोलने की भी जरूरत नहीं है। यह बग फोन में पहुंचते ही ऐक्टिवेट होकर अपना काम शुरू कर देता है।

ड्रेक ने लिखा, ‘अगर अटैक सफल हो गया तो आपके देखने से पहले खुद-ब-खुद इन्फेक्टेड मेसेज को डिलीट भी कर देगा। आपको सिर्फ नोटिफिकेशन दिखाई देगी, मेसेज नहीं। यह बहुत ही खतरनाक कमियां हैं क्योंकि यहां विक्टिम कुछ नहीं कर पाएगा।’

लिपि तो हिन्दी है व्याकरण भी हिन्दी है पर शब्द सारे अंग्रेज़ी में है । कारण?

दो कारण है:

  1. हिन्दी ना सिर्फ़ नैसर्गिक अवस्था में है उसका विस्तार बड़ी ही धीमी गति से हो रहा है । तकनीकि शब्दों का क़तई अभाव है ।
  2. समाचार पत्रों में हिन्दी के जानकार ही नहीं है ।
पहला कारण विस्तार में:

आ़जादी के समय हिन्दी को हिन्दुस्तानी कहा जाता था। उस समय की हिन्दी वास्तविकता में उर्दू ही थी। धीरे धीरे हिन्दी का अपना शब्दकोश बनता चला गया और उर्दू प्रयोग से बाहर हो गई।
लेकिन अन्तर्जाल के द्वारा सूचना का विस्फोटन होने के बाद और रोज़ नये नये चलितभाष आने से अग्ंरेजी शब्दों की बाढ़ आ गइ और हिन्दी बोलने वाले तो जैसे सकते में आ गये। क्या इस तेज़ी से नये शब्दों का विकास हो पायेगा? यह प्रश्न नहीं हताशा का वक्तव्य बन गया।

दूसरा कारण:

हिन्दी हमने पढ़ी नहीं क्योंकि वह हमारी मात्र भाषा है।  अग्रंेजी हम पढ़ते नहीं क्योंकि वह विदेशी भाषा है। अन्त्त्ताह हम खिचड़ी हिंगलिश से ही गुज़ारा करते है जो अब हिन्दी समाचारों की भाषा बन गई है ।  आश्चर्य नहीं है कि अंग्रेज़ी माध्यम के बच्चे हिन्दी से परहेज़ करते है। यही हाल रहा तो शीघ्र ही हिन्दी दम तोड़ कर संस्क्रित और उर्दू की भाँति रविवार को ही दूरदर्शन पर ही दिखेगी।

समाचार पत्र वालों जागो । अगर मैं एक शब्द एक पृष्ठ पर नया बना सकता हूँ तो आप लोग क्या नहीं कर सकते। उठो और हिन्दी को बचाओ । या फिर अलविदा कह दो ।

(चलितभाष अर्थात मोबाइल फ़ोन)

About Sandeep Bhalla

A lawyer, thinker, author, Linux/Ubuntu power user and sometime an economist or gardener or philosopher or cook or photographer depending upon the current thought and environment. View all posts by Sandeep Bhalla

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